5 Common Myths About Mental Health Debunked
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रांतियाँ समाज में गहरे तक समाई हुई हैं, जो न केवल गलत धारणाओं को जन्म देती हैं, बल्कि मानसिक समस्याओं से जूझ रहे व्यक्तियों के लिए मदद प्राप्त करना भी कठिन बना देती हैं। आइए जानते हैं उन 5 सामान्य भ्रांतियों के बारे में और उनका वैज्ञानिक खंडन।
1. “मानसिक बीमारियाँ केवल कमजोर व्यक्तियों को होती हैं”
यह भ्रांति समाज में बहुत प्रचलित है कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ केवल उन्हीं व्यक्तियों को होती हैं जो मानसिक रूप से कमजोर होते हैं। वास्तव में, मानसिक बीमारियाँ जैविक, जैनेटिक, पर्यावरणीय और सामाजिक कारणों से उत्पन्न होती हैं। उदाहरण के लिए, डिप्रेशन, एंग्जायटी और अन्य मानसिक विकारों के लिए मस्तिष्क में रासायनिक असंतुलन, आनुवंशिक प्रवृत्तियाँ, जीवन में तनावपूर्ण घटनाएँ और सामाजिक अलगाव जिम्मेदार हो सकते हैं।
इसलिए, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ किसी की कमजोरी का परिणाम नहीं हैं, बल्कि ये जटिल कारकों का परिणाम होती हैं।
2. “थैरेपी केवल गंभीर मानसिक विकारों के लिए होती है”
यह भ्रांति भी बहुत आम है कि थैरेपी केवल गंभीर मानसिक विकारों के लिए होती है। वास्तव में, थैरेपी का उद्देश्य किसी भी मानसिक समस्या या तनाव को समझना और उसका समाधान खोजना है। चाहे वह सामान्य चिंता हो, रिश्तों में तनाव हो, या जीवन के किसी अन्य पहलू में समस्या हो, थैरेपी मददगार साबित हो सकती है। यह एक प्रकार की मानसिक देखभाल है जो किसी भी व्यक्ति के लिए फायदेमंद हो सकती है।
3. “मानसिक विकारों का इलाज केवल दवाइयों से संभव है”
यह भ्रांति है कि मानसिक विकारों का इलाज केवल दवाइयों से ही संभव है। हालांकि, दवाइयाँ कुछ मामलों में मददगार होती हैं, लेकिन थैरेपी, जीवनशैली में बदलाव, सामाजिक समर्थन और अन्य उपाय भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उदाहरण के लिए, संज्ञानात्मक-व्यवहारात्मक थैरेपी (CBT) और अन्य प्रकार की थैरेपी मानसिक विकारों के इलाज में प्रभावी साबित हुई हैं।
4. “मानसिक विकारों वाले लोग हिंसक होते हैं”
यह भ्रांति है कि मानसिक विकारों वाले लोग हिंसक होते हैं। वास्तव में, अधिकांश मानसिक विकारों वाले लोग हिंसक नहीं होते। अधिकांश मानसिक विकारों वाले लोग समाज में सक्रिय और उत्पादक सदस्य होते हैं। यह भ्रांति मीडिया की गलत प्रस्तुतियों और समाज में फैली गलत धारणाओं के कारण है।
5. “मानसिक विकारों का इलाज नहीं हो सकता”
यह भ्रांति है कि मानसिक विकारों का इलाज नहीं हो सकता। वास्तव में, मानसिक विकारों का इलाज संभव है। समय पर इलाज, थैरेपी, दवाइयाँ और जीवनशैली में बदलाव से अधिकांश लोग मानसिक विकारों से उबर सकते हैं और सामान्य जीवन जी सकते हैं।
निष्कर्ष:
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रांतियाँ समाज में गहरे तक समाई हुई हैं, जो मानसिक विकारों से जूझ रहे व्यक्तियों के लिए मदद प्राप्त करना कठिन बना देती हैं। इन भ्रांतियों को दूर करने के लिए समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। हमें यह समझना होगा कि मानसिक विकारों का इलाज संभव है और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना कमजोरी का संकेत नहीं है।
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