WHO Issues New Guidelines on Air Pollution and Health
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2025 में अपने वायु गुणवत्ता मानकों को अद्यतन किया है, जिससे वैश्विक स्तर पर वायु प्रदूषण और उससे संबंधित स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।
🌍 नई दिशा-निर्देशों का उद्देश्य
WHO ने 2021 में वायु गुणवत्ता दिशा-निर्देश (AQGs) जारी किए थे, जिनमें प्रमुख प्रदूषकों के लिए नए सीमा स्तर निर्धारित किए गए थे। इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करना है, जो अब तक के सबसे गंभीर पर्यावरणीय स्वास्थ्य खतरों में से एक माना जाता है।
🧪 प्रमुख प्रदूषकों के लिए नए सीमा स्तर
WHO ने छह प्रमुख प्रदूषकों के लिए नए सीमा स्तर निर्धारित किए हैं:
- PM₂.₅ (Fine Particulate Matter): इसका स्तर आधा कर दिया गया है।
- PM₁₀: इसका स्तर भी घटाया गया है।
- नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂): इसका स्तर 75% कम किया गया है।
- ओज़ोन (O₃), सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂), और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO): इन प्रदूषकों के लिए भी नए सीमा स्तर निर्धारित किए गए हैं।
📊 WHO एयर गुणवत्ता मानक डेटाबेस
WHO ने एक इंटरएक्टिव डेटाबेस जारी किया है, जिसमें लगभग 140 देशों के वायु गुणवत्ता मानकों की जानकारी उपलब्ध है। यह डेटाबेस नीति निर्माताओं, सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों और शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है, जो वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठा सकते हैं।
🏥 स्वास्थ्य पर प्रभाव
WHO के अनुसार, हर वर्ष वायु प्रदूषण के कारण लगभग 7 मिलियन लोगों की समय से पहले मृत्यु होती है। यह बच्चों में फेफड़ों की वृद्धि में कमी, श्वसन संक्रमण और अस्थमा जैसी समस्याओं का कारण बनता है। वयस्कों में इस्केमिक हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी बीमारियों का प्रमुख कारण है।
🌱 जलवायु परिवर्तन और वायु गुणवत्ता
वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन आपस में जुड़े हुए हैं। प्रदूषण कम करने के उपाय जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को भी कम कर सकते हैं। WHO का कहना है कि वायु गुणवत्ता में सुधार से न केवल स्वास्थ्य लाभ होगा, बल्कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों में भी कमी आएगी।
🇮🇳 भारत में स्थिति
भारत में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या है, विशेषकर शहरी क्षेत्रों में। WHO के दिशा-निर्देशों को अपनाकर भारत में प्रदूषण स्तर को कम किया जा सकता है, जिससे लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है।
WHO के नए दिशा-निर्देश वैश्विक स्तर पर वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हैं। इनका पालन करके हम स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण की ओर बढ़ सकते हैं।
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